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न रेत, न सीमेंट, न प्लास्टर,मज़बूत दीवारों के लिए जापानी तकनीक से पेंट करें

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मुंबई / जॉन मेढे /राकेश निर्मोही

जापान और भारत की दोस्ती, जिसकी तुलना फीनिक्स से की गई है, एक अटूट बंधन है। यह बात केवल एशियाई महाद्वीप ही जानता है। जापान ने नई तकनीक को आत्मसात किया है और उसका उपयोग विश्व कल्याण के लिए किया है। इसी तरह, जापान एक अत्यंत शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और अनुशासित देश है। इसलिए, भारतीय संस्कृति और परंपरा से इसके संबंध जुड़े हुए हैं। इतिहास इसका प्रमाण है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, भारत और जापान की मैत्रीपूर्ण व्यापार नीति है। इसी के अनुसार, सभी समझौते किए जाते हैं।

इसी तर्ज पर, इको-फ्रेंडली वॉल कलर भारत में तकनीक-आधारित पेंट लाने के उद्देश्य से काम कर रहा है। यह जानकारी डॉ. प्रमोद वाहने ने स्वतंत्र जनसमाचार से एक साक्षात्कार के दौरान दी।

वर्ष 2000 से, भारत और जापान वैश्विक व्यापार उद्योग में भागीदार रहे हैं। 2006 से 2014 के बीच, इन दोनों देशों ने दुनिया को अपनी अनूठी मित्रता से परिचित कराया है।
भारत में उत्पादक क्षमता होने के बावजूद, उत्पादन के स्रोतों का सही दिशा में उपयोग नहीं हो रहा है। इसीलिए हम भारतीय उत्पादन स्रोतों और जापानी तकनीक को अपनाकर एक नई तकनीक विकसित कर रहे हैं।
इसी कड़ी में, हम वॉल पेंट लाने की कोशिश कर रहे हैं।

जापान में बसे डॉ. प्रमोद वाहने नागपुर के बेटे हैं। उनकी बचपन की शिक्षा नागपुर में हुई। पशु वैद्यकीय में डाक्ट्रेट स्नातक करने के बाद, उन्होंने एक दौर में मुंबई में आरे डेयरी में सेवा दी और उसके उपरांत नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में काम किया। एक बीमा कंपनी के ज़रिए उन्हें विदेश जाने का मौका मिला। उन्होंने अमेरिका में अपना कारोबार जारी रखा। बाद में, वे अमेरिका छोड़कर जापान में बस गए। वे जापान में बसने वाले पहले भारतीय नागरिक हैं।

इसके अलावा, वे जापान में इंडियन जापान इंग्लिश स्कूल के निदेशक और टोक्यो चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। वे कचरे से हाइड्रोजन बनाने और अपशिष्ट प्रबंधन करने वाली एक कंपनी के निदेशक के रूप में काम कर रहे हैं।
वर्तमान में, वे इको-फ्रेंडली वॉल कलर नामक तकनीकी रूप से विकसित पेंट भारत लाने वाले हैं
।

आमतौर पर, जब हम घर बनाते हैं, तो हम मिट्टी, रेत, सीमेंट, कांक्रीट का इस्तेमाल करते हैं और फिर उस पर प्लास्टर करते हैं। उसके बाद पेंट लगाया जाता है।
डॉ का दावा है कि वैज्ञानिक शांतनु मेनन और मासाओमी सुजुकी द्वारा विकसित नई तकनीक से अब दीवारों पर प्लास्टर करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। दरअसल, जापानी तकनीक का पूरी दुनिया में दबदबा है। निर्माण तकनीक में जापान की बराबरी कोई नहीं कर सकता।

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