सबकी आंखें हुईं नम
आपदाओं से बचाव के प्रयासों को समझने का किया जायेगा प्रयास
देहरादून/मुंबई/काठमांडू | 30 अगस्त 2026
विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए समर्पित संस्था हिमालयन अकादमी ऑफ साइंस & टेक्नोलॉजी (HAST) ने नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड/आइस-रॉक एवलॉन्च आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में ऑनलाइन शोक सभा एवं अंतरराष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए साझा वैज्ञानिक सहयोग को सशक्त बनाने पर विमर्श करना था।
कार्यक्रम में नेपाल सहित विभिन्न हिमालयी राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों, आपदा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गोष्ठी की शुरुआत आपदा में दिवंगत लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर तथा नेपाल की जनता के प्रति गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त करते हुए की गई।

विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और मानवजनित गतिविधियों के कारण विश्वभर में बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि हिमालय जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिक सहयोग, साझा डेटा प्रणाली, प्रभावी पूर्व चेतावनी तंत्र तथा समुदाय आधारित आपदा तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है।
काठमांडू से ऑनलाइन जुड़े आपदा विशेषज्ञ डॉ बसंत अधिकारी ने बताया कि यह आपदा लैंगटांग पर्वत की उत्तरी ढलान से उत्पन्न हिमस्खलन और उसके बाद हुए मलबा प्रवाह के कारण हुई। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक भूकंपीय संकेतों के आधार पर पहले भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों ने घटना की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट कर दी। उनके अनुसार, इस घटना के वैज्ञानिक विश्लेषण में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और आपदा विशेषज्ञ जुटे हुए हैं।
गोष्ठी में यह भी रेखांकित किया गया कि हिमालय आपदा जोखिम की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जिसकी पारिस्थितिकी राजनीतिक सीमाओं से परे है। ऐसे में भारत, नेपाल और चीन के बीच वैज्ञानिक सूचनाओं, जोखिम मानचित्रण, मॉडलिंग तथा पूर्व चेतावनी संबंधी डेटा के प्रभावी आदान-प्रदान को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने हिमालयी क्षेत्रों में अनियोजित एवं असुरक्षित निर्माण गतिविधियों की निगरानी, आपदारोधी बस्तियों के विकास तथा दीर्घकालिक एवं समग्र विकास नीति तैयार करने पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही ग्राम स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का नेटवर्क विकसित करने, महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा ग्लेशियरों की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
बैठक के समापन पर HAST ने भारत और नेपाल के प्रशिक्षित रॉक-आइस एवलॉन्च वैज्ञानिकों को साझा मंच पर जोड़ने, संयुक्त वैज्ञानिक एवं नीतिगत पहल विकसित करने तथा हिमालयी क्षेत्र में सतत क्षमता निर्माण के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।
गोष्ठी में HAST के अध्यक्ष प्रो दुर्गेश पंत, महासचिव प्रह्लाद अधिकारी, संस्थापक अध्यक्ष डॉ गोपाल रावत, पद्मश्री से सम्मानित श्री कल्याण सिंह रावत, आसाम केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजीव पंत, दिनेश त्यागी जी, आपदा विशेषज्ञ डॉ पियूष रौतेला, डॉ रीमा पंत पंत, IIT बम्बई के प्रो पियूष पांडेय, डॉ राजीव जोशी, श्री राहुल नय्यर, श्री भूपेंद्र भैंसोड़ा, श्री विनोद तनेजा, डॉ रोशन आरा, डॉ दीपशिखा रावत, डॉ सुषमा गैरोला सहित अनेक विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

