मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चौथी बार बैठक कर दिखाई संवेदनशीलता;
रोहित पवार बताएं, आखिर आंदोलन किसलिए किया गया?
पढ़ाई और समय के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

मुंबई, 12 अक्टूबर 2026:
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) से जुड़े छात्रों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लगातार चौथी बार बैठक आयोजित कर सकारात्मक चर्चा किए जाने पर विधायक विक्रम पाचपुते ने उनका हृदय से आभार व्यक्त किया है। साथ ही उन्होंने इस पूरे आंदोलन की मंशा और राजनीतिक भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विधायक पाचपुते ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी ने एक बार फिर साबित किया है कि उनकी सरकार छात्रों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतने दिनों तक यह आंदोलन किस उद्देश्य से चलाया गया? यह वास्तव में छात्रों के हितों का आंदोलन था या राजनीतिक स्वार्थ के लिए खड़ा किया गया आंदोलन?”
रोहित पवार बताएं – आंदोलन इस्तीफे के लिए था या छुट्टी के लिए?
पाचपुते ने कहा कि 30 सितंबर को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में रोहित पवार के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को संवैधानिक प्रावधानों और प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई थी।
उन्होंने कहा, “संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को पद से हटाने की एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया है। राज्य सरकार सीधे अध्यक्ष का इस्तीफा नहीं ले सकती और न ही उन्हें मनमाने ढंग से पद से हटा सकती है। यह बात रोहित पवार को पहले से मालूम थी।”
“जब 30 सितंबर को ही संवैधानिक स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी, तो उसके बाद भी छात्रों को आंदोलन में क्यों उलझाए रखा गया? यदि अंततः अध्यक्ष का नैतिक आधार पर छुट्टी पर जाना ही समाधान था, तो यह पहले क्यों नहीं किया जा सकता था?” पाचपुते ने सवाल किया।
छात्रों की पढ़ाई का नुकसान – जिम्मेदार कौन?
विधायक पाचपुते ने कहा कि आंदोलन में शामिल अनेक विद्यार्थी अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी छोड़कर कई दिनों तक सड़कों पर बैठे रहे।
“ये विद्यार्थी सामान्य परिवारों से आते हैं। उनके माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष करते हैं। एक-एक दिन की पढ़ाई उनके जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। राजनीतिक नेताओं के लिए आंदोलन एक राजनीतिक अवसर हो सकता है, लेकिन विद्यार्थियों के लिए उनके जीवन का बहुमूल्य समय दांव पर लगा होता है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि “यदि अंततः कोई नया संवैधानिक निर्णय नहीं हुआ और अध्यक्ष नैतिक आधार पर छुट्टी पर गए, तो इतने दिनों तक छात्रों को आंदोलन में रखने का औचित्य क्या था? उनके समय, पढ़ाई और मानसिक तनाव की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल बंद होना चाहिए
रोहित पवार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पाचपुते ने कहा कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं को हल करने के बजाय आंदोलन को राजनीतिक स्वरूप देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
“लोकतंत्र में आंदोलन करने का अधिकार सभी को है। छात्रों की मांगों को उठाना भी आवश्यक है। लेकिन जब किसी मुद्दे की संवैधानिक सीमाएं और समाधान की प्रक्रिया पहले से स्पष्ट हो, तब भी विद्यार्थियों को लगातार आंदोलन में बनाए रखना कई सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा चलती रहेगी। नेता आते-जाते रहेंगे, सरकारें भी बदलती रहेंगी, लेकिन किसी विद्यार्थी का खोया हुआ समय वापस नहीं आ सकता।
राजनीति का लाभ नेताओं को, नुकसान विद्यार्थियों को
पाचपुते ने कहा, “राजनीतिक आंदोलनों से नेताओं को प्रसिद्धि मिल सकती है, राजनीतिक लाभ भी हो सकता है। लेकिन यदि ऐसे आंदोलनों में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है, तो उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई आगे नहीं आता।”
उन्होंने रोहित पवार से सीधे सवाल किया:
“रोहित पवार जी, आपने इस आंदोलन से आखिर हासिल क्या किया? और इस आंदोलन में शामिल छात्रों ने क्या हासिल किया? यदि 30 सितंबर को ही संवैधानिक स्थिति स्पष्ट थी, तो छात्रों को इतने दिनों तक आंदोलन में क्यों रखा गया?”
विद्यार्थी देश का भविष्य हैं, राजनीतिक साधन नहीं
पाचपुते ने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक मार्ग से संघर्ष अवश्य करें, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या नेता को अपने भविष्य का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए न करने दें।
उन्होंने कहा, “छात्र केवल किसी आंदोलन की भीड़ नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र और देश का भविष्य हैं। उनके भविष्य की कीमत पर राजनीति करना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व को शोभा नहीं देता।”
“राजनीति आज भी चल रही है और आने वाले वर्षों में भी चलती रहेगी। लेकिन विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण वर्ष, एक परीक्षा का अवसर या उनकी तैयारी का एक दिन भी वापस नहीं लौटाया जा सकता। इसलिए छात्रों को अब अधिक सजग रहने की आवश्यकता है।”
अंत में विधायक पाचपुते ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दिखाई है। अब सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों के हितों को अपनी राजनीति से ऊपर रखें।

