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FSSAI का प्रस्ताव : दूध से नहीं बने उत्पाद को ‘पनीर’ नाम से बेचने पर लगेगी रोक. विधानसभा में उठा एक सवाल जो राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया। अब बनेंगे कड़े नियम

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विधानसभा के सवाल से राष्ट्रीय नियम तक पहुंचा ‘बनावटी पनीर’ का मुद्दा

राकेश के निर्मोही
मुंबई, 26 सितंबर। महाराष्ट्र विधानसभा में मार्च 2025 में उठाया गया एनालॉग यानी गैर-डेयरी पनीर का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रस्तावित नियम संशोधन में दूध से प्राप्त न होने वाले उत्पादों को ‘Paneer’ के नाम से प्रस्तुत करने पर रोक लगाने का प्रावधान किया है।

‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में आने वाले उत्पाद भी अपने नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।


श्रीगोंदा के विधायक विक्रम पाचपुते ने मार्च 2025 में महाराष्ट्र विधानसभा में असली डेयरी पनीर और एनालॉग पनीर के नमूने पेश कर सवाल उठाया था कि एक जैसे दिखने वाले दोनों उत्पादों में अंतर सामान्य उपभोक्ता कैसे पहचाने। उन्होंने इसे उपभोक्ता के जानने के अधिकार, खाद्य सुरक्षा और दूध उत्पादक किसानों के हित से जुड़ा विषय बताया था।


इसके बाद महाराष्ट्र में होटल, रेस्तरां, कैटरर्स और फास्ट-फूड प्रतिष्ठानों को एनालॉग पनीर या चीज के इस्तेमाल की जानकारी मेन्यू कार्ड अथवा डिस्प्ले पर स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए। आगे राज्य में एनालॉग/गैर-डेयरी पनीर के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल पर एक वर्ष की रोक भी लगाई गई।


अब FSSAI के प्रस्ताव से यह मुद्दा राज्य की सीमा पार कर राष्ट्रीय नियामकीय प्रक्रिया में पहुंच गया है। प्रस्ताव का उद्देश्य ‘पनीर’ नाम को लेकर उपभोक्ताओं के बीच होने वाली संभावित भ्रम की स्थिति को दूर करना है।
विधायक पाचपुते ने कहा कि विधानसभा में उठाया गया यह सवाल अब राष्ट्रीय नियमों में बदलाव की प्रक्रिया तक पहुंचा है। उन्होंने इसे उपभोक्ताओं, दूध उत्पादकों, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया।

60 दिन तक मांगे सुझाव


FSSAI ने प्रस्तावित नियमों पर जनता और संबंधित पक्षों से 60 दिनों के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। पाचपुते ने उपभोक्ताओं, दूध उत्पादकों, डेयरी उद्योग, उपभोक्ता संगठनों, डॉक्टरों, पोषण विशेषज्ञों और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों से मसौदे का अध्ययन कर रचनात्मक सुझाव देने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए देश में कहीं भी ‘पनीर’ के नाम पर उपभोक्ता को ऐसा उत्पाद न मिले जिसकी वास्तविक प्रकृति उसके लिए अस्पष्ट हो.

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