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एनसीपी की केंद्रीय कार्यकारिणी से सभी बड़े नेताओं का हुआ सफाया..राष्ट्रीय अध्यक्ष, महासचिव और सचिव तीनों महत्वपूर्ण पदों पर अजित पवार परिवार का ही दबदबा..प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, बृजमोहन श्रीवास्तव, दिलीप वलसे पाटिल,हसन मुश्रीफ का भी नाम गायब..

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एनसीपी अजित पवार की केंद्रीय कार्यकारिणी में अजित पवार परिवार का ही दबदबा नई राष्ट्रीय सूची से पार्टी के भीतर हलचल;

सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर उठे सवाल


राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़े बदलावों से पार्टी गलियारों में चर्चा तेज-

-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नवघोषित राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने राजनीतिक हलकों, वरिष्ठ नेताओं तथा लंबे समय से संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच व्यापक चर्चा, आश्चर्य और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है।

हाल ही में जारी नई सूची के अनुसार, कई ऐसे अनुभवी और वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं को नवगठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान नहीं दिया गया है, जिन्होंने वर्षों तक संगठन को खड़ा करने, विस्तार देने और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पिछली सूची से बाहर किए गए प्रमुख नेताओं में राज्यसभा सांसद प्रफुल पटेल, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष,सांसद सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल, ब्रिजमोहन श्रीवास्तव, एडवोकेट जलालुद्दीन, एन.ए. कुट्टी तथा वाई.पी. त्रिवेदी शामिल हैं।

सबसे अधिक राजनीतिक चर्चा में पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ राज्यसभा सदस्य प्रफुल पटेल को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर रखा जाना बना हुआ है। पटेल लगभग 25 वर्ष से अधिक समय से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे थे तथा पार्टी के विभाजन में अजित पवार के सबसे मजबूत साथियों में वे पहले हैं।

पटेल का राष्ट्रीय स्तर पर उनके लंबे अनुभव, संगठनात्मक योगदान और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उनका नाम सूची में न होना पार्टी के भीतर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

इसी प्रकार, महाराष्ट्र से राकांपा के एकमात्र निर्वाचित लोकसभा सांसद तथा पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल सुनील तटकरे को भी राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर नहीं रखा गया।

वह वर्ष 2022 से इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसदीय अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के बावजूद उनका हटाया जाना चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

इन घटनाक्रमों ने पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच यह बहस छेड़ दी है कि पार्टी की नई संगठनात्मक रणनीति, आंतरिक पुनर्गठन और वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका भविष्य में किस दिशा में जाएगी।देश के विभिन्न राज्यों में पार्टी कार्यकर्ता अब बारीकी से देख रहे हैं

कि नया नेतृत्व इन चिंताओं का समाधान किस प्रकार करता है और अनुभव तथा संगठनात्मक विस्तार के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है।इसी बीच, पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची ने कई राज्यों में कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और लंबे समय से जिम्मेदारी निभा रहे पदाधिकारियों के बीच गंभीर चर्चा और स्पष्ट असंतोष पैदा कर दिया है।

सूची के अनुसार, पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पद एक ही परिवार के भीतर केंद्रित दिखाई दे रहे हैं। श्रीमती सुनेत्रा अजित पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि उनके पुत्र पार्थ अजित पवार और जय अजित पवार को क्रमशः राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद दिए गए हैं। पवार परिवार के भीतर संगठनात्मक शक्ति का यह केंद्रीकरण पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रियाओं का कारण बन रहा है।

वहीं दूसरी ओर, देशभर में संगठन को खड़ा करने वाले कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को नई संरचना में स्थान नहीं दिया गया है। साथ ही धनंजय शर्मा, राणा रणवीर सिंह, डॉ. रमन प्रीत सिंह और डॉ. अभिषेक वी. बोके को संगठन में जिम्मेदारियां दिए जाने से कार्यकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है।

कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह नई संगठनात्मक व्यवस्था का सूत्रधार पार्थ पवार का नाम घसीटा जा रहा है। सूत्रों का मानना है कि यदि नई नियुक्तियों के पीछे अपनाए गए मानकों और सोच को लेकर स्पष्टता नहीं दी गई, तो आने वाले समय में पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक हलचल और बढ़ सकती है।

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