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उत्तराखंड लोक समाज के सर्वोच्च साहित्य संस्कृति सम्मान से सम्मानित होंगे प्रख्यात साहित्यकार एस आर हरनोट :

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उत्तराखंड लोक समाज का नरेन्द्र सिंह नेगी सर्वोच्च संस्कृति सम्मान इस वर्ष हिमाचल निवासी प्रख्यात साहित्यकार व संस्कृति एक्टिविस्ट एस आर हरनोट को दिया जाएगा। उत्तराखण्ड लोक समाज के बैनर तले विभिन्न संगठन मिलकर प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी के जन्मदिन पर नरेन्द्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान प्रदान करते हैं। नेगी जी के जन्मदिन 12 अगस्त 2025 को यह सम्मान दिया जाना था परंतु धराली प्राकृतिक आपदा की वजह से अब यह सम्मान सितम्बर माह में प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड लोक समाज के आयोजन समिति के प्रतिनिधि गणेश खुगशाल गणी द्वारा आज मीडिया को दी गई है।

उन्होंने बताया कि नरेन्द्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान हिमालयी राज्यों में भाषा,साहित्य,संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्व को प्रदान किया जाता है। पहला सम्मान वर्ष 2024 में उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी को यह सम्मान प्रदान किया गया था। इस सम्मान में प्रशस्ति और दो लाख इक्यावन हजार रुपए की धनराशि प्रदान की जाती है।
 इस वर्ष का नरेन्द्र सिंह नेगी सर्वोच्च संस्कृति सम्मान हिमाचल के वरिष्ठ साहित्यकार संत राम हरनोट को उनके द्वारा साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण के क्षेत्र में किए जा रहे बहुआयामी योगदान के दृष्टिगत प्रदान किया जाएगा।

हिमाचल के निवासी हरनोट वरिष्ठ साहित्यकार हैं जो अपने साहित्य कर्म के लिए अंतरराष्ट्रीय और अनेक राष्ट्रीय प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हैं। एस आर हरनोट जी की बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। तीन आलोचना पुस्तकें विभिन्न प्रकाशनों से उनके कृतित्व पर प्रकाशित हो चुकी है।
हरनोट जी के साहित्य पर अभी तक 22 एम फिल और 8 पीएचडी पूर्ण हो चुकी है और 12 पीएचडी शोध देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में जारी है। देश के लगभग 15 विश्वविद्यालयों में उनके उपन्यास और कहानियां बीए और एमए के पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जा रही है। इसके अतिरिक्त उनकी कृतियां देश और विदेश की तकरीबन साठ से ज्यादा विश्वविद्यालयों में किए जा रहे शोधों में शामिल की गई है। हरनोट जी हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच, हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष भी हैं जिसके बैनर में वे प्रतिवर्ष अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक, पर्यावरण और लोक संगीत के आयोजन करते हैं। वे हिमाचल अकादमी के सम्माननीय सदस्य भी हैं।

             हरनोट जी की तीन कहानियों पर लघु फिल्में बनी है।
सात कहानियों का नाट्य मंचन हुआ है। उनकी कहानियों का जर्मन,पंजाबी,अंग्रेजी, मराठी, मलयालम, उर्दू, गुजराती, पहाड़ी, उड़िया, रूसी के साथ कई अन्य भाषाओं में अनुवाद हुए हैं।

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