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नबे सालों की यादें ताज़ा कर रहा है ऑल इंडिया रेडियो

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आकाशवाणी की “आराधना” सफल रही

✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल

ऑल इंडिया रेडियो के नामकरण के 90 वर्ष की श्रृंखला में इन दिनों विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सुरमयी साधना का आराधना उत्सव भी मनाया गया। आमंत्रित कलाकार थी, विदुषी शुभा मुद्गल, जिन्होंने भक्ति संगीत के सुरों से सभागार में बैठे दर्शकों को भावविभोर कर दिया। यह आयोजन सोमवार, 25 मई को आकाशवाणी के सभागार रंगभवन, संसद मार्ग नई दिल्ली, में आयोजित किया गया।

पूरा रंगभवन सभागार संगीत प्रेमी दर्शकों से भरा हुआ था। इस अवसर पर आरंभ में दीप प्रज्ज्वलन में शामिल थे -राजीव भारद्वाज -सदस्य कार्मिक प्रसार भारती, के. सतीश नंबूदरीपाद- महानिदेशक दूरदर्शन, राजीव जैन-महानिदेशक- आकाशवाणी, मनीषा जैन कार्यक्रम प्रमुख आकाशवाणी दिल्ली। विदुषी शुभा मुद्गल ने अपनी प्रस्तुति में निर्गुण और सगुण भजन सुनाए।

उन्होंने एक निर्गुण से आराधना का शुभारंभ किया। शब्द थे- साहब हैं रंगरेज चुनरी मेरी रंग डाली… (रचना कबीर)“देखो सखी री दोनों बैठे नांव में” भजन जिस सधे स्वर में उन्होंने प्रस्तुत किया उसकी सराहना दर्शकों ने तालियां बजाकर की।भजन “नाचे छैल छबीला नंद का कुमार” और रैदास जी का लिखा पद “अब कैसे छूटे नाम रटना”…. जैसी भक्तिपूर्ण रचनाएं सुनकर श्रोताओं की वाहवाही की ध्वनि की और तालियां बजाकर उत्साह वर्धन किया। बढ़ते हुए समाज में जो पारंपरिक रचनाएं प्रचलन में नहीं हैं, ऐसी रचनाओं को सुनना अपने आप में दिल खुश करने वाली बात है।

विदुषी शुभा मुद्गल की भजन गायकी में तबले पर डॉ. अनीस वसंत प्रधान, सारंगी पर उस्ताद मुराद अली और हारमोनियम पर विनय कुमार मिश्रा संगतकार थे। सभागार से बाहर निकलते हुए दर्शकों के चेहरे पर उभरी प्रसन्नता बता रही थी आकाशवाणी की आराधना सफल रही।

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