संकलन जाॅन मेढे मुंबई,
ठाणे – मानसून की दस्तक के बावजूद ठाणे शहर की सड़कें आज भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रही हैं। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों, जलभराव और कीचड़ ने आवागमन को जोखिमभरा बना दिया है। सड़कें अपनी दुर्दशा पर मानो प्रशासन से बदलाव की गुहार लगा रही हैं, लेकिन संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण नागरिकों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

ठाणे स्टेशन से सटा एसटी बस अड्डा परिसर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। परिसर में कीचड़, गाद और गंदगी का अंबार लगा है, जिससे दुर्गंध फैल रही है और यात्रियों, पैदल राहगीरों तथा आसपास के नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

वहीं, सार्वजनिक शौचालयों की जर्जर अवस्था और अस्वच्छता ने विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा छात्र-छात्राओं की कठिनाइयों को और बढ़ा दिया है।ठाणे शहर का प्रवेशद्वार माने जाने वाले इस क्षेत्र की ऐसी दुर्दशा शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शहर के प्रवेश स्थल की यह स्थिति है, तो अन्य क्षेत्रों की दशा का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
एनसीपी नेता एडवोकेट अमित पाटील, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद बनसोडे, विद्यार्थी पालक कृति संघ के अध्यक्ष नरेंद्र सावंत, सचिन बनकर, लक्ष्मण अंभोरे, ऐसे कई लोगों ने मनपा प्रशासन और संबंधित विभागों को इस दिशा में तुरंत सख्त कदम उठाने की अपील की।
नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि रेलवे स्टेशन के आसपास अवैध फेरीवालों और खाद्य सामग्री की अस्थायी दुकानों के बढ़ते अतिक्रमण से यातायात और स्वच्छता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
लोगों ने प्रशासन से इस अव्यवस्था पर तत्काल अंकुश लगाने और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।स्थानीय लोगों का कहना है कि ठाणे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जिले के पालक मंत्री तथा राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक का गृह जिला है, वहां भी यदि जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है। नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से शीघ्र प्रभावी कार्रवाई कर ठाणे एसटी बस अड्डे और आसपास के क्षेत्र की बदहाल व्यवस्था में सुधार लाने की मांग की है।

