Header Ad
Hindi News / Blog / Literature

आकाशवाणी में गूंजी हिंदी कविता की स्वर-लहरियां कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने बांधा समां, दूर तक पहुंचा हिंदी के वैश्विक विस्तार का संदेश

Article Top Ad

नई दिल्ली। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आकाशवाणी और विश्व हिंदी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में 22 सितंबर को आकाशवाणी दिल्ली के भारत रत्न पं. रविशंकर स्टूडियो में हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। आमंत्रित श्रोताओं की मौजूदगी में कवियों ने विविध भावों और संवेदनाओं से परिपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कर साहित्यिक वातावरण को जीवंत कर दिया।

कवि सम्मेलन में देवी प्रसाद मिश्र, ऋचा बनर्जी, डॉ. मनोज कुमार शुक्ल उपाख्य अभि दा, दिनेश ध्यानी, सुबोध कुमार भारद्वाज, रजनी सैनी, अभिनव भारद्वाज और पार्थसारथि थपलियाल ने काव्य-पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन पार्थसारथि थपलियाल ने किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम प्रमुख मनीशा जैन ने कवियों का सम्मान किया। सहायक निदेशक कार्यक्रम प्रमोद कुमार वत्स और राम अवतार बैरवा ने अतिथियों का स्वागत किया।अभिनव भारद्वाज ने नई पीढ़ी के तेवर और संवेदना को स्वर देते हुए कहा “खुशी की तलाश में जिंदगी गुजर गई, उम्र तो ढल गई मगर खुशी किधर गई…

” वहीं रजनी सैनी ने हिंदी के प्रति आत्मीय भाव व्यक्त करते हुए सुनाया “कानों से नहीं, हृदय से सुनना, मैं हिंदी में बोल रही हूं।

”सुबोध कुमार भारद्वाज की ओजपूर्ण पंक्तियों— “आंधियां भी आईं लाखों मगर, हौसलों ने न झुकना सीखा इधर…”पर श्रोताओं ने खूब सराहना की।

डॉ. मनोज कुमार शुक्ल ‘अभि दा’ ने राम के आगमन पर आधारित कविता से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया. “दिल में जो बसे थे, सामने आ गए, राम आ गए, मेरे राम आ गए।

”दिनेश ध्यानी ने कोसी नदी की त्रासदी और उससे उपजी मानवीय पीड़ा को अपनी मार्मिक कविता में स्वर दिया। उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। विश्व हिंदी परिषद दिल्ली की अध्यक्ष ऋचा बनर्जी ने ‘तूफान’ कविता के माध्यम से आपदा के बाद की निस्तब्धता और जीवन की संवेदनशील तस्वीर प्रस्तुत की।

संचालक पार्थसारथि थपलियाल के आग्रह पर प्रतिष्ठित हिंदी कवि राम अवतार बैरवा ने भी दोहे सुनाए। पार्थसारथि थपलियाल ने हिंदी पर कविता और दोहों की प्रस्तुति दी।विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्र ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को विश्व भाषा बनाने के लिए सभी भारतीयों को दत्तचित्त होकर समर्पण भाव से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने आयोजन में सहभागिता के लिए आकाशवाणी का आभार व्यक्त किया।कविता, संवेदना और हिंदी-प्रेम से सराबोर यह आयोजन श्रोताओं के लिए यादगार साहित्यिक अनुभव बन गया।

Article Inline Ad
Article Bottom Ad

```html
🔔
Get Latest News Updates
Allow notifications to receive the latest news and important updates.
```