क्वालिटी एजुकेशन की शान, टीचर्स का सच्चा सम्मान!
पुणे -शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील ने पुणे में आयोजित विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेकर शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों और शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों का उत्साहवर्धन किया।

उन्होंने अपने संबोधनों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार और शिक्षकों के सम्मान को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।सबसे पहले सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के संत ज्ञानेश्वर ऑडिटोरियम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ‘डॉ. जे. पी. नाइक आदर्श राज्य शिक्षक पुरस्कार’ समारोह में चंद्रकांत दादा पाटील मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 के बाद 14 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात केवल योग्यता के आधार पर पुरस्कार प्रदान करने की परंपरा पुनः शुरू की गई है और राज्य के 42 प्रतिभाशाली प्राध्यापकों एवं शिक्षकों को सम्मानित करते हुए उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।उन्होंने कहा कि आज ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही न दे, बल्कि उनमें चिंतन की क्षमता विकसित करे तथा जीवन मूल्यों का संस्कार भी प्रदान करे।

उन्होंने अगले वर्ष से नॉन-टीचिंग स्टाफ को भी सम्मानित करने तथा शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्पेशल अवॉर्ड’ शुरू करने की घोषणा भी की।इस समारोह में हायर एजुकेशन डायरेक्टर डॉ. शैलेंद्र देवलंकर, डॉ. किशोर इंगले, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. सुरेश गोसावी, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पराग कलकर, रजिस्ट्रार डॉ. प्रफुल्ल पवार, राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों के पुरस्कार प्राप्त प्राध्यापक, शिक्षक, नॉन-टीचिंग स्टाफ तथा विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
इसके बाद चंद्रकांत दादा पाटील इंदिरा ग्रुप ऑफ़
इंस्टिट्यूट्स की 33वीं वर्षगांठ एवं विश्वविद्यालय की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

उन्होंने संस्थान को आगामी शैक्षणिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति में ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी और छोटी शैक्षणिक इकाइयों की अवधारणा शिक्षा में नवाचार को नई दिशा दे रही है।उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मन से असुरक्षा की भावना दूर करने, उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने तथा श्रम की गरिमा के प्रति जागरूकता विकसित करने के लिए प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में काउंसलिंग सेंटर की स्थापना आवश्यक है।

इस अवसर पर कॉर्पोरेटर राहुल कलाटे, चांसलर डॉ. तरीता शंकर, चेतन वकालकर, सरिता वकालकर, वसंत म्हस्के, बाबाराव जाधवराव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित तीसरे कार्यक्रम ‘महाराष्ट्र एजुकेशन एंड कॉर्पोरेट अवार्ड्स 2026’ समारोह में भी चंद्रकांत दादा पाटील ने सहभागिता की।
इस दौरान शिक्षा एवं कॉर्पोरेट क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। उन्होंने आयोजकों की उस पहल की सराहना की

, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक ज्ञान और उद्योग जगत की व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना है।उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप देश में अनुसंधान के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सकारात्मक बदलावों के कारण भारतीय शोध कार्यों को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिल रही है और विदेशी कंपनियां भी भारतीय अनुसंधान को प्राथमिकता दे रही हैं।इस समारोह में सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. पराग कालकर, ‘एनस्क्वेयर एक्सपर्ट्स’ के फाउंडर एवं CEO नीलेश कांकरिया, पुणे GST कमिश्नर दिनेश भोईर, एडिशनल GST कमिश्नर प्रसाद गोरसे, पुणे ज़ोन के एडिशनल कस्टम कमिश्नर शिवकुमार सालुंखे सहित शिक्षा, उद्योग और प्रशासन से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

