मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के इंजीनियरों के तबादलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भाजपा विधायक मिहिर कोटेचा ने राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को पत्र लिखकर अतिरिक्त नगर आयुक्त (पूर्व उपनगर) अविनाश ढाकणे की भूमिका की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

उनका आरोप है कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा मांगी गई जानकारी निर्धारित समय के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।कोटेचा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2025 में बीएमसी के 165 इंजीनियरों के तबादले किए गए थे। उस समय भी इन तबादलों में कथित “कैश फॉर ट्रांसफर” की शिकायत सामने आई थी। भाजपा विधायक अमित साटम ने इस संबंध में लिखित शिकायत की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर तबादला आदेश रद्द कर दिए गए थे।

विधायक कोटेचा के अनुसार, 15 मई 2026 को उन्होंने नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर बताया था कि लगभग 165 इंजीनियरों की पूर्व प्रस्तावित सूची में शामिल करीब 50 प्रतिशत अधिकारियों को फिर से नई तबादला सूची में शामिल किया गया है। उनका दावा है कि यह प्रस्ताव अतिरिक्त नगर आयुक्त (पूर्व उपनगर) अविनाश ढाकणे के मार्गदर्शन में तैयार किया गया था। कोटेचा के पत्र पर संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त ने प्रस्तावित तबादला सूची को निरस्त कर दिया था।कोटेचा ने दावा किया है कि दो से तीन महीने पहले हुए इंजीनियरों के तबादलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और उनके पास कथित “रेट कार्ड” सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध हैं।
इन दावों की पुष्टि के लिए उन्होंने 5 अगस्त 2026 को अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकणे से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, लेकिन 26 दिन बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।विधायक का कहना है कि यदि मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दी जाए तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि इंजीनियरों के तबादलों में एक बार फिर कथित “कैश फॉर ट्रांसफर” का खेल हुआ है या नहीं। उनका आरोप है कि सूचना देने में हो रही देरी से संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर संदेह और बढ़ गया है।मिहिर कोटेचा ने मुख्य सचिव से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने तथा जानकारी उपलब्ध कराने में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

