उत्तराखंड क्रांति दल प्रवासियों से जुटा रहा है जनसमर्थन #बालासाहेब ठाकरे परिवार से मांगा सहयोग/आशीष नेगी छाए रहे मुंबईकर उत्तराखंडी की जुबां पर
मुंबई दौरे ने उक्रांद युवा अध्यक्ष आशीष नेगी की राजनीति को दी नई धार
, उद्धव ठाकरे से मिला समर्थन का भरोसा
मुंबई। उत्तराखंड की वर्तमान राजनीति में उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के युवा केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी का दो दिवसीय मुंबई दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हुआ, बल्कि इसने उनके भविष्य के राजनीतिक सपनों को भी नई उड़ान दे दी। एक ओर उन्होंने सीधे उद्धव ठाकरे से मातोश्री पहुंचकर मुलाकात की और आगामी समय में शिवसेना के सहयोग का भरोसा प्राप्त किया, वहीं दूसरी ओर कौथिग महोत्सव के मंच से हजारों प्रवासी उत्तराखंडियों के बीच उत्तराखंड की मौजूदा नीतियों और पहाड़ विरोधी राजनीति के खिलाफ प्रभावी संदेश देने में भी सफलता हासिल की।

इन दिनों उक्रांद में युवा चेहरों के बीच तेजी से उभर रहे आशीष नेगी अपनी तेजतर्रार शैली, स्पष्ट राजनीतिक दृष्टिकोण और प्रभावशाली वक्तृत्व कला के कारण युवाओं के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।
मुंबई की अपनी पहली राजनीतिक यात्रा में ही उन्हें ऐसे समर्थक और संपर्क मिले, जिन्होंने सीधे उन्हें मातोश्री तक पहुंचा दिया। इस दौरान शिवसेना के बड़े बड़े नेताओं को मिले जिनमें सांसद अनिल सांवत,सांसद डॉ. अनिल देसाई, सांसद विनायक राऊत, विधायक मिलिंद नार्वेकर सहित उक्रांद से जुड़े दीपक ढोंडियाल, महेश चंद रजवार, बलवीर सिंह रावत, चामू सिंह रावत और श्याम सिंह बिष्ट, ज्योती सिंह राठौड़,जैसे अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

मुलाकात के दौरान आशीष नेगी ने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के उत्तराखंड प्रेम को याद करते हुए कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौर में मुजफ्फरनगर कांड पर जब राष्ट्रीय दलों के अधिकांश नेता चुप्पी साधे हुए थे, तब बालासाहेब ठाकरे ने खुलकर उत्तराखंड राज्य की मांग का समर्थन किया था और तत्कालीन सरकार की तीखी आलोचना की थी।

उन्होंने कहा कि दशहरा रैली जैसे बड़े मंच पर उक्रांद नेता दिवाकर भट्ट को स्थान देने वाले भी बालासाहेब ठाकरे ही थे। इसलिए शिवसेना और उक्रांद का संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वर्षों पुराना भावनात्मक और वैचारिक रिश्ता है।नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्षों बाद आज फिर क्षेत्रीय अस्मिता और पहाड़ के हितों की रक्षा के लिए शिवसेना जैसे सहयोगी दलों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और भविष्य में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
स्वतंत्र जनसमाचार से विशेष बातचीत में आशीष नेगी ने स्पष्ट कहा कि उनकी लड़ाई केवल सड़क, अस्पताल या पलायन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिमालयी राज्यों के लिए बनाई गई वन नीति को सही तरीके से लागू कराने की लड़ाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में वन्यजीवों के नाम पर पहाड़ के लोगों में भय का वातावरण तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सके। उनके अनुसार यह एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसके माध्यम से पहाड़ और पहाड़ी समाज को कमजोर किया जा रहा है।नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों का अधिकार लगातार कमजोर होता जा रहा है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों से दूसरे प्रदेश लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि स्थानीय जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्यटन और बाहरी निवेशकों को बढ़ावा देने में अधिक रुचि ले रही है, लेकिन गांवों तक सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार पहुंचाने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा कि सरकार के पास गैरसैंण को कर्णप्रयाग से जोड़ने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है, लेकिन पहाड़ों में सुरंग परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि कृषि, बागवानी और स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में भी सरकार ने पहाड़ के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए।

आशीष नेगी ने जोर देकर कहा कि अब उत्तराखंड को केवल क्षेत्रीय दल ही न्याय दिला सकते हैं, क्योंकि राष्ट्रीय दलों ने पहाड़ की मूल भावना और समस्याओं को कभी प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को निर्णायक बताते हुए प्रवासी उत्तराखंडियों से तन, मन और धन से सहयोग की अपील की। इसी क्रम में उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये के सहयोग अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की, जिसकी पहली सहमति उद्धव ठाकरे से ली गई।
