आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा बदरी विशाल मंदिर एवं मानव-कल्याण केंद्र

अनिल वेदव्यास गलगली
आरटीआई कार्यकर्ता
संपादक- अग्निशिला
वसई पालघर -(पश्चिम) में आध्यात्मिक आस्था का केंद्र: श्री बद्री विशाल मंदिर एवं मानव कल्याण केंद्र का भव्य धार्मिक महोत्सव

वसई (पश्चिम) स्थित श्री बद्री विशाल मंदिर एवं मानव कल्याण केंद्र द्वारा 18 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026 तक एक भव्य धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
यह महोत्सव केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का विराट संगम है, जो उत्तराखंड की पावन परंपराओं को महाराष्ट्र की भूमि पर साकार करता है।
यह आयोजन उत्तरांचल मित्र मंडल की लगभग 35 वर्षों की तपस्या, श्रद्धा और निरंतर प्रयासों का दिव्य प्रतिफल है। वर्षों की मेहनत और समर्पण के बाद यह मंदिर आज न केवल उत्तराखंड वासियों के लिए, बल्कि समस्त समाज के लिए एक आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र बन चुका है।
महाराष्ट्र जैसे विविधतापूर्ण राज्य में इस मंदिर का निर्माण वास्तव में एक “दिव्य भेंट” के समान है।

यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सामाजिक गतिविधियां आयोजित होती रहती हैं, जिससे समाज में सकारात्मकता और एकजुटता का संदेश प्रसारित होता है।
इस पुण्य कार्य में प्रमुख रूप से अध्यक्ष माधवानंद भट्ट, महासचिव महेश चंद्र नैनवाल, कोषाध्यक्ष कुंदन सिंह बिष्ट, गोपाल सिंह मेहरा, गोविंद पांडे, महेंद्रसिंह रावत, मनोहर सिंह रौथाण, महेंद्र सिंह धामी, मोहन सिंह राजपूत, नरेंद्र पाल नेगी, गोपाल सिंह कार्की, होशियार सिंह दसोनी, चंद्रकांत शर्मा, गणेश भारद्वाज, लज्जावंती भट्ट जैसे समर्पित व्यक्तित्वों का विशेष योगदान रहा है। इन सभी से समय-समय पर संवाद और मुलाकात के माध्यम से मंदिर के विकास और गतिविधियों को नई दिशा मिलती रही है।मंदिर के माध्यम से लगातार धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उपक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है, जिसमें सभी वर्गों के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। यह केंद्र न केवल पूजा का स्थान है, बल्कि समाज सेवा, संस्कार निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण का एक सशक्त मंच भी बन चुका है।आगामी महोत्सव में भव्य पूजा-अर्चना, कथा-प्रवचन, भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।यह महोत्सव निश्चित रूप से वसई क्षेत्र के धार्मिक और सामाजिक जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा तथा समाज में भाईचारे, सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव को और अधिक सुदृढ़ करेगा।