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फ्लाइ किलर आधुनिक समय की जरुरी कहानी.. कथाकार, उपन्यासकार और कवि एस आर हरनोट के साहित्य पर मुंबई में हुई चर्चा

मुंबई स्वरसंगम फाउंडेशन की गोष्ठी में एस. आर. हरनोट की कहानी ‘फ्लाइ किलर‘ का पाठ स्वरसंगम फाउंडेशन के तत्वावधान में एक गरिमामय साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम के केंद्र में सुप्रसिद्ध कथाकार एवं उपन्यासकार एस. आर. हरनोट का कहानी पाठ रहा, जिसमें उन्होंने अपनी बहुचर्चित लंबी कहानी ‘फ्लाइ किलर’ का वाचन किया।

यह कहानी एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के उत्तर-जीवन के संघर्षों और सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों के बीच उपजी जिल्लत का मर्मस्पर्शी वृतांत है।अपनी कहानी के माध्यम से हरनोट जी ने वर्तमान समय की दो प्रमुख घटनाओं

नोटबंदी और रोमियो स्क्वाड के कारण एक बुजुर्ग नायक को झेलनी पड़ने वाली मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना को बेहद संजीदगी से उभारा। कहानी में एक चीड़ के पेड़ और उसके नीचे स्थित एक बेंच के रूपक का उपयोग कर कथाकार ने एक महाकाव्यात्मक दृश्य उपस्थित किया,

जो पाठकों और श्रोताओं को देर तक बांधे रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ संचालक रमन मिश्र द्वारा किया गया, जिन्होंने एस. आर. हरनोट के व्यक्तित्व और उनके विशाल साहित्यिक अवदान से श्रोताओं को परिचित कराया। इसके पश्चात डॉ. हूबनाथ पांडे ने हरनोट जी और पहाड़ के अटूट संबंध को रेखांकित करती अपनी एक विशिष्ट कविता का पाठ किया। कहानी पाठ के उपरांत आयोजित परिचर्चा में उपस्थित साहित्यकारों ने कहानी के शिल्प और कथ्य पर गंभीर विमर्श किया।

परिचर्चा में प्रमुख रूप से: विनोद गुप्त शलभ, प्रो. श्याम दिवाकर, शैलेश सिंह, जुल्मीराम सिंह, रीता दास राम, दिनेश शाकुल, हृदयेश मयंक शामिल रहे।उपरोक्त वक्ताओं ने ‘फ्लाइ किलर’ को आधुनिक समय की एक जरूरी कहानी बताते हुए इसके प्रतीकों और रिटायरमेंट के दर्द पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि और लेखक अनूप सेठी ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने हरनोट जी की लेखन शैली और उनकी कहानियों में व्याप्त लोक-जीवन की सोंधी गंध और नाट्य संभावनाओं की सराहना की।कार्यक्रम के अंत में कलाकार विनीता वर्मा द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया एक ‘साहित्यिक झोला’ और ‘कविता पोस्टर’ भेंट कर एस. आर. हरनोट का सम्मान किया गया। इस गोष्ठी में शहर के अनेक गणमान्य साहित्य प्रेमी और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।

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