सिंधी समुदाय ने हिम्मत और एकता की निशानी के तौर पर काम किया – सी. पी राधाकृष्णन
सिंधी दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में सिंधी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सिंधी भाषा में, देवनागरी और फ़ारसी दोनों लिपियों में भारत का संविधान जारी किया

।सी पी राधाकृष्णन ने सिंधी भाषा दिवस के मौके पर इसे जारी करने पर खुशी जताते हुए, सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा पर रोशनी डाली और कहा कि बंटवारे के बाद मुश्किल समय में सिंधी भाषा ने हिम्मत और एकता की निशानी के तौर पर काम किया।उन्होंने कहा कि सिंधी में संविधान जारी करना भाषाई समावेश को बढ़ावा देने में एक अहम मील का पत्थर है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस तरह की कोशिशों से लोग अपनी मातृभाषा में संविधान को समझ पाते हैं, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी और भरोसा मज़बूत होता है।

इस मौके पर केंद्रीय कानून और न्याय और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल; राजस्थान विधानसभा के स्पीकर, वासुदेव देवनानी; लोकसभा के सांसद, शंकर लालवानी , समेत विभिन्न राज्यों से आए सिंधी समुदाय के विशिष्ट समाजसेवियों में मुंबई से पहुंचे नारायण बबलानी,डॉ. प्रताप पिंजानी,डॉ. अजीत मन्याल,किशोर अजवानी,किशोर मन्याल,रमेश वाधवानी आदि अनेकों गणमान्य लोगों की उपस्थिति हुई।

सभी ने भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। मुंबई से पहुंचे किशोर मन्याल ने कहा कि सिंधी भाषा में संविधान पढ़ा जाना गर्व की बात है. बोली -भाषा का महत्व संस्कारों, संस्कृति, रीति परंपराओं पर भी पड़ता है सिंधी समुदाय की भाषा उन्नत भाषा के साथ एक बड़ी संख्या में घरों में बोली जाती है।अब संविधान भी इसमें पढ़ा जाना मोदी सरकार की भाषाओं के प्रति समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करती है।
