महिला दिवस पर भायंदर में उत्तराखंडी परंपरा ‘धियाणियों तें कलेवु’ की अनूठी झलक

उत्तरा़चल मित्र मंडल के आयोजन में सैकड़ों महिलाओं की सहभागिता, महानगर में जीवंत हुई पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत
ठाणे – भायंदर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2026 को उत्तराँचल मित्र मंडल, भायंदर द्वारा उत्तराखंड की प्राचीन और भावनात्मक परंपरा “धियाणियों तें कलेवु” का आयोजन किया गया। महानगर में पहली बार आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रवासी उत्तराखंडी समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रेरक प्रयास प्रस्तुत किया।

बहिनों के लटके झटके भी दिखे और विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय भूमिका और ऊंचाइयां भी

बहिनों के लटके झटके भी दिखे और विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय भूमिका और ऊंचाइयां भी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताओं, बहनों और बेटियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इस पारंपरिक उत्सव को उल्लासपूर्ण बना दिया।

इस दौरान संगीत, फैशन शो, नृत्य-नाटिका, अंताक्षरी और भजन जैसी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत की, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा।

उत्तराखंड की प्रसिद्ध कोरियोग्राफर श्रीमती रेशमा रौथान की आकर्षक कोरियोग्राफी ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को विशेष गरिमा प्रदान की। वहीं श्रीमती कृष्णा डंगवाल, श्रीमती मीना कंसवाल और श्रीमती सतेस्वरी फर्शवान ने उत्कृष्ट समन्वय करते हुए बड़ी संख्या में महिलाओं को एक मंच पर एकत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम की।

गांव से सीधे मुंबई में आया अरशा
विशेषता यह रही कि पारंपरिक कलेवु के लिए लगभग 100 किलो अरशा सीधे उत्तराखंड के गाँवों से मंगवाया गया।
उत्तराखंड में धियानियों को कलेवु में अरशा देने की सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से यह विशेष व्यवस्था की गई। इस कार्य के लिए मंडल के कोषाध्यक्ष भगवान सिंह राणा और उनकी पूरी टीम ने शानदार भूमिका निभाई।
आयोजकों के अनुसार, आज के समय में नई पीढ़ी अपने पारंपरिक त्योहारों, रीति-रिवाजों और बोली-भाषा से दूर होती जा रही है।

ऐसे में यह आयोजन सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
