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अंडमान में सक्रिय हुआ भारत और दक्षिण एशिया का इकलौता ज्वालामुखी

पोर्ट ब्लेयर। अंडमान और निकोबार में भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया का इकलौता ज्वालामुखी बैरन द्वीप एक बार फिर सक्रिय हो गया है। राजधानी पोर्ट ब्लेयर से करीब 135-140 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित ज्वालामुखी में करीब 3 साल बाद विस्फोट हुआ है। वैसे ज्वालामुखी 5 से 10 साल में प्रमुख चक्र के साथ फटता है, लेकिन हाल के दशक में यह ज्यादा सक्रिय हुआ है।

कितने साल बाद फटा ज्वालामुखी?
बैरन द्वीप ज्वालामुखी 2018 से लगातार सक्रिय रहा है। यहां पिछले सालों में 2018, 2019, 2022, 2024 में घटना हुई हैं, लेकिन हाल का विस्फोट 2022 के बाद पहली बार है। इस महीने 2 मध्यम विस्फोट 13 और 20 सितंबर को हुए हैं। इससे पहले 2024 के अंतिम में हल्के विस्फोट हुए थे। हालांकि, अब बताया जा रहा है कि ज्वालामुखी की गतिविधि कम हो रही है। इस बार भी लावा कम और धुआं ज्यादा देखा गया है।

140 साल तक शांत रहा था ज्वालामुखी
बैरन ज्वालामुखी का पहला विस्फोट 1737 में हुआ। इसके बाद 1852 में। करीब 140 साल यह शांत रहा, फिर 1991 में विस्फोट हुआ। 2017 में यहां 17 साल बाद बड़ा विस्फोट हुआ।
2005 का विस्फोट हिंद महासागर में 2004 में आए भूकंप से जुड़ा था।

बैरन द्वीप पर ज्वालामुखी विस्फोट से कितना नुकसान?
बैरन द्वीप पर कोई इंसान-जंतु नहीं रहता। यहां चट्टान और राख ही दिखती है। द्वीप का क्षेत्रफल 3 किलोमीटर है और इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 354 मीटर है। निर्जन द्वीप होने के कारण यहां ज्वालामुखी के विस्फोट से ज्यादा नुकसान नहीं है, लेकिन 1991 के ऐतिहासिक विस्फोट से यहां पक्षियों की 16 में 6 प्रजाति कम हो गई थीं। समुद्र में होने के कारण विस्फोट समुद्री जीवों के लिए भी खतरनाक है। जोरदार विस्फोट भूकंप भी ला सकता है।

इस बार कितना जोरदार था विस्फोट?
पिछली बार विस्फोट में इसका धुआं बादलों में 2.1 किमी ऊंचाई तक पहुंचे, जो पूर्वोत्तर की तरफ फैले थे। इस बार जो विस्फोट हुआ उसमें हल्का लावा और धुआं देखा गया, जो मध्यम था। वोल्केनिक एक्सप्लोसिविटी इंडेक्स (VEI) पर ज्यादातर विस्फोट VEI 2 (2017 की तरह मध्यम) दर्ज किए गए हैं। अभी तक कोई बड़े विस्फोट (VEI 4+) का इतिहास नहीं है। हालांकि, भारत से जुड़ी एजेंसियां गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।

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