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स्थापना के १३६ वें वर्ष में प्रवेश कर रही है मुंबई वैद्य सभा सम्मान समारोह सम्पन्न .

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आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है मुंबई की वेद्य सभा ने .आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है मुंबई की वेद्य सभा ने .

मुंबई वैद्य सभा द्वारा पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित—

–-स्थापना के १३६ वां वर्ष में प्रवेश कर चुकी है मुंबई वैद्य सभा आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है इस संस्था ने

मुंबई – पिछले कई वर्षों से, मुंबई वैद्य सभा आयुर्वेद जगत के प्रतिष्ठित चिकित्सकों को सम्मानित करने के लिए धन्वंतरि पुरस्कार प्रदान करती आ रही है।

इस वर्ष 9 नवंबर 2025 को विलेपार्ले स्थित होटल पार्ले इंटरनेशनल में बड़ी भव्यता के साथ यह कार्यक्रम आयोजित था जिसमें मुख्य अतिथि नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश दुबे और विशिष्ट अतिथि धूतपापेश्वर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रंजीत पौराणिक थे। वहीं सम्मानित अतिथियों में डॉ. साक्षी घोलप और डॉ. तनुजा सुरनार के हाथों दीप प्रज्वलित कर धन्वंतरि स्तोत्र का गायन से समारोह का शुभारंभ हुआ ।

इस वर्ष का धन्वंतरि पुरस्कार डॉ. परांजपे और डॉ. विनोद मेहता को प्रदान किया गया और आजीवन उपलब्धि पुरस्कार डॉ. सुभाष जोशी को प्रदान किया गया।इस वर्ष के समारोह की एक विशेष विशेषता मुंबई संभाग के सभी आयुर्वेद महाविद्यालयों के बीएएमएस अंतिम वर्ष में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों (टॉपर्स) को प्रमाण पत्र और ग्यारह हज़ार रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान करना था।

श्री धुतपापेश्वर आयुर्वेद विद्यालय समिति ने इसमें पूर्ण सहयोग दिया। डॉ. श्री किरण किनी ने समिति की गतिविधियों की जानकारी दी। पुरस्कार विजेता डॉ. परांजपे, डॉ. मेहता और डॉ. जोशी ने अपने अनुभव साझा किए, जो नई पीढ़ी के लिए बहुमूल्य मार्गदर्शन का काम करेंगे। डॉ. विनोद मेहता ने नई पीढ़ी को सदैव आगे बढ़ने और कड़ी मेहनत करने की सलाह दी। मुंबई वैद्य सभा के अध्यक्ष डॉ. श्यामसुंदर शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में आयुर्वेद के सिद्धांतों, रोगी की प्रकृति और दोषों के आधार पर रोगियों के उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के और अधिक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया।

संस्था के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्री राजेंद्र शर्मा ने संस्था की पिछले कुछ वर्षों की विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उनका मानना था कि आयुर्वेद के क्षेत्र में इतने वर्षों तक अपनी स्थिति बनाए रखना असंभव है। यह तभी संभव है जब स्वार्थ की नहीं, बल्कि सेवा की भावना हो। डॉ. तेजस मऊ ने अपनी विशिष्ट सादगी, सहजता और आकर्षण के साथ समारोह का संचालन किया।

डॉ. एल.डी. शुक्ला, डॉ. एच.बी. सिंह, डॉ. रमन मिस्त्री, डॉ. अमर द्विवेदी, डॉ. महेंद्र चतुर्वेदी, डॉ. दिलीप त्रिवेदी, डॉ. ऋजुता दुबे, डॉ. मनन मेहता, डॉ. जान्हवी मेहता और डॉ. यूनुस इस अवसर पर उपस्थित थे और उन्हें पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। डॉ. पूर्णिमा बिदाये, डॉ. अंजू चेतिया, डॉ. शिल्पा दोखा, डॉ. विनीत मिश्रा, डॉ. सर्वेश शर्मा, डॉ. वसंत वलेपवार और डॉ. एम.पी. शाह सभी ने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. हर्षद जोशी ने सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम की शुरुआत में परोसे गए स्वादिष्ट भोजन और अंत में हाई टी की सभी ने सराहना की। समारोह का समापन राष्ट्रगान के सम्मानपूर्ण गायन के साथ हुआ

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