Blog

सर्वार्थ सिद्धि सतयुग साकेत महायज्ञ में नितिन गडकरी ने डाली विश्व कल्याण के लिए आहुतियां..

नवी मुंबई में साकेत महायज्ञ में शामिल होकर किया बाबा श्री विश्वनाथ का रुद्राभिषेक

नवी मुंबई – पावने टीटीसी एरिया गामी इंडस्ट्रियल इस्टेट –

परम पूज्य गुरु पूज्य सद्गुरुश्री दयाल के दिव्य सानिध्य से अनुप्राणित सर्वार्थसिद्धि सतयुग स्वागत साकेत महायज्ञ 2025 में सैकड़ों भक्तगणों ने उपस्थिति दर्ज कर जीवन को धन्य धन्य किया।24 दिसंबर से शुरू यह महायज्ञ 3 जनवरी को समाप्त हो रहा है।
नवी मुंबई के पावने टीटीसी एरिया के गामी इंडस्ट्रियल इस्टेट में बड़ी भव्यता से चल रहे इस महायज्ञ में देशभर और विदेशों से भी श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई ।

जिनके भाजपा के वरिष्ठ नेता केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने महायज्ञ में शामिल हुए और वैदिक यज्ञ में मुख्य यजमान की भूमिका निभाई।
भगवान श्री बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक किया।साथ हवन में आहुतियां दी।


सदगुरु श्री दयाल महाराज जी ने इस यज्ञ के बारे में बताते हुए कहा कि

यह महायज्ञ केवल वैदिक विधि-विधान का अनुष्ठान नहीं, अपितु आत्मा के गहन संस्कारों का शोधन और चेतना के नवोन्मेष का दिव्य प्रसंग है। यह जीवन में संचित नकारात्मक कर्मों के अंधकार को भस्म कर, काम, अर्थ और धर्म की त्रिवेणी में आपको स्नान कराता हुआ मोक्ष-पथ की ओर अग्रसर करता है।

काशी से पधारे विद्वानों के श्रीमुख से निःसृत महामंत्रों की दिव्य स्वर-लहरियाँ आपके चित्त को पावन करेंगी, दैविक शक्तियों की सजीव उपस्थिति का बोध कराएँगी और आपको परम आनंद के अलौकिक स्पंदनों से ओतप्रोत कर देंगी।

यह महायज्ञ नौ कुंडीय स्वरुप में संपन्न हो रहा है, जिसमें आठ प्रकार के विलक्षण एवं विशिष्ट यज्ञ कुंड समाहित हैं। प्राचीन वैदिक परंपरा में हवन मात्र अग्नि में आहुति देने का कर्मकांड नहीं, बल्कि चेतना के जागरण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा-संतुलन का सूक्ष्म विज्ञान है। प्रत्येक यज्ञ कुंड अपनी विशिष्ट आकृति के माध्यम से विशिष्ट ऊर्जा प्रवाह का सृजन करता है, जो साधक के जीवन को अनेक स्तरों पर रुपांतरित करता है।

वर्गाकार कुंड स्थैर्य, प्रगति और मानसिक संतुलन का प्रतीक है, जो जीवन में समृद्धि, प्रतिष्ठा और स्थयित्व की सुदृढ नींव रखता है।

त्रिकोणाकार कुंड सुरक्षा, विजय और पराक्रम का कारक है; यह चुनाव, संघर्ष, विवाद और प्रतिस्पर्धा में सफलता का द्वार खोलता है तथा साहस और आत्मबल को जाग्रत करता है।

वृत्ताकार कुंड शांति, सौहार्द, मानसिक शीतलता और सामाजिक एकता का वाहक है, जिससे परिवार और समाज में सामंजस्य की अविरल धारा प्रवाहित होती है।

अर्धचंद्राकार कुंड कोमलता, करुणा और पोषण का प्रतीक है, जो मानसिक संतोष और आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

षट्कोणीय कुंड धर्म, न्याय और संतुलन का अधिष्ठान है, जो जटिल कष्टों से मुक्ति, शत्रु-क्षय तथा अन्याय और संघर्ष से रक्षा कर विवेक को दृढ करता है।

अष्टकोणीय कुंड आरोग्य और दीर्घायु का प्रतीक बनकर एक रक्षा-कवच के समान शरीर और मन को नव-ऊर्जा से अनुप्रमाणित करता है।

हृदय अथवा योनि आकृति कुंड प्रेम, सृजन और पारिवारिक सामंजस्य का प्रतीक है, जो दाम्पत्य जीवन और संतान सुख को पुष्ट करता है।

पद्माकृति कुंड धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों की सिद्धि का दिव्य सेतु है, जो साधक को आंतरिक पवित्रता, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक उत्कर्ष प्रदान करता है।

इस प्रकार यज्ञ कुंडों की विविध आकृतियाँ यज्ञ की चेतना को विशिष्ट दिशा प्रदान करती हैं और जीवन स्वयं यज्ञमय होकर दिव्यता से महमहा उठता है, जहाँ कर्म, भावना और चेतना एकाकार होकर साधना बन जाती हैं।

उन्होंने कहा कि आज और कल शाम तक का समय अब शेष है इसलिए वे सभी सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले सज्जनों को आमंत्रित करते हैं कि वह एक बार जरूर आएं।

आइए, इस अद्वितीय महायज्ञ के माध्यम से स्वयं को दिव्य अनुभूतियों से आलोकित करें और अपने जीवन को एक नवीन, पावन और अनुपम दिशा प्रदान करें। यह अवसर आपके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ भौतिक और आंतरिक अनंत आनंद का साक्षी बनेगा।

आपकी मंगलमलय उपस्थिति की प्रतीक्षा में।परम पूज्य गुरु पूज्य सद्गुरुश्री दयाल के दिव्य सानिध्य से अनुप्राणित सर्वार्थसिद्धि सतयुग स्वागत साकेत महायज्ञ 2025 में सैकड़ों भक्तगणों ने उपस्थिति दर्ज कर जीवन को धन्य धन्य किया।24 दिसंबर से शुरू यह महायज्ञ 3 जनवरी को समाप्त हो रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button