सम्मान, संस्कार, संघर्ष और संस्कृति की आधारशिला है नारी – पूनम संत #पूनम संत महिला एवं विकास समिति का महिला सम्मान समारोह सम्पन्न
महिला दिवस पर सम्मानित और पुरुस्कृत हुई महिलाएं

मीरारोड – नारी समाज की शक्ति, संस्कारों की वाहक और संस्कृति की आधारशिला है। यदि महिलाएँ सशक्त और आत्मनिर्भर होंगी तो परिवार, समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त बनेगा यह उद्गार पूनम संत महिला एवं विकास समिति
महाराष्ट्र प्रदेश समिति आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती पूनम संत ने कहे थे. यह कार्यक्रम होटल द फर्न रेजीडेंसी, काशीमीरा, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे, मीरा रोड (महाराष्ट्र) में किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में “नारी — सम्मान, संस्कार, संघर्ष और संस्कृति” विषय पर एक भव्य नारी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भी आयोजन था जिसकी शुरुआत विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मीरा-भायंदर की महापौर श्रीमती डिंपल विनोद मेहता जी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती पूनम संत जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती इसाबेल ब्रेंडिश जी तथा राष्ट्रीय सचिव अभिषेक संत जी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती चंद्रवती त्रिपाठी ने की।

कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी किशोर भट्ट, प्रदेश सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रभारी श्रीमती सरिता हर्पल्ले, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती चंदा जैन, प्रदेश सह प्रभारी डॉ. सुनीता त्रिपाठी, प्रदेश महासचिव श्रीमती शुभांगी सिंह, तथा प्रदेश सचिव श्रीमती अंजू जैन, श्रीमती पूनम पाठक, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, श्रीमती कंचन केसरवानी सहित प्रदेश समिति के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में “नारी — सम्मान, संस्कार, संघर्ष और संस्कृति” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. संजय पाण्डेय (निदेशक, यूरोलॉजी, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल), श्रीमती नीरजा मिश्रा , डॉ. सुन्दरी ठाकुर तथा श्रीमती बिंदु दुबे (वरिष्ठ अधिवक्ता, बॉम्बे उच्च न्यायालय) ने नारी शक्ति, समाज में महिलाओं की भूमिका तथा वर्तमान समय में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता पर अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर संस्था द्वारा संचालित जनहितकारी अभियानों — “बेटी है तो कल है”, “मिशन दुर्गा” एवं “सखी जोड़ो अभियान” की जानकारी भी साझा की गई तथा महिलाओं को इन अभियानों से जुड़कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली मातृशक्ति को सम्मानित किया गया।
इनका हुआ सम्मान
इनमें प्रमुख रूप से श्रीमती पूनम मिश्रा (शिक्षा), श्रीमती दीपा घोड़ाबांकर (सांस्कृतिक), डॉ. रेचना भारती (पर्यावरण), श्रीमती करिश्मा हेमनानी (सांस्कृतिक), श्रीमती सोमांगा भट्टाचार्य (सांस्कृतिक), श्रीमती जिनिता पंड्या (योग एवं फिटनेस), श्रीमती शिल्पा भाविन देढिया (खेल), श्रीमती भावना तिवारी (समाजसेवा), श्रीमती नीलम सिंह (समाजसेवा), एडवोकेट मिलन सोहेर (विधि एवं न्याय), डॉ. रागिनी बाजपेयी (स्वास्थ्य), श्रीमती नीलम तेली (शिक्षा), श्रीमती कृष्णा सिंह (योग), श्रीमती दीपान्विता भट्टाचार्य (उद्यमिता), एडवोकेट डॉ. प्रीति दुबे (विधि एवं न्याय), सुश्री सिद्धी वाकड़े (योग), श्रीमती हर्षा लखानी (समाजसेवा), डॉ. ईशिता चतुर्वेदी (चिकित्सा), श्रीमती अर्चना जाधव (प्रशासन), श्रीमती रेशमा डोडके (खेल), श्रीमती संगीता सिंह (स्पोर्ट्स), श्रीमती कविता शर्मा (योग), श्रीमती नूतन आलोक पांडे (समाजसेवा), डॉ. लीला अग्रवाल (चिकित्सा), श्रीमती रश्मि लाठौरिया (सांस्कृतिक), श्रीमती शिल्पा देसाई (समाजसेवा), श्रीमती जीलल खान (सांस्कृतिक), सुश्री साक्षी सेमवाल (पत्रकारिता), डॉ. वीणा रावत नारंगरे (सांस्कृतिक), श्रीमती चंदन अमोल पाटिल (पत्रकारिता), श्रीमती आकांक्षा निगम (प्रशासन) तथा सुश्री अर्चना शर्मा (सांस्कृतिक) को उनके-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सरिता हर्पल्ले द्वारा किया गया।