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दुनिया को भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं से परिचित होना चाहिए… जितेंद्र परदेशी

फ्रांस और मुंबई के छात्रों का कार्यक्रम सम्पन्न –

छात्रों के लिए हर देश की संस्कृति सभ्यता और तकनीकी आदान प्रदान बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

मुंबई – दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएँ, मानव संस्कृति एक ही हैं। अंतर केवल संचार के माध्यम का है।

संचार से संबंध बनते हैं और आगे चलकर गहरी मित्रता विकसित होती है।

वाणी, प्रेम और मित्रता विश्व को एक करते हैं। इस सत्य को नकारा नहीं जा सकता। और इसीलिए मझगांव स्थित सेंट मैरी स्कूल विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और पारंपरिक परंपराओं के आदान-प्रदान के लिए जाति, धर्म, पंथ से परे विविधता से परिपूर्ण भारतीय परंपरा का प्रतीक है। इसका अतीत और समृद्ध भाषाई, सामाजिक-शैक्षणिक और आर्थिक संबंध जीवन शैली, पहलुओं, भावनाओं और संवेदनाओं के साथ हैं।

इस विद्यालय ने हाल ही में इसका एक ठोस उदाहरण भारत-फ्रांस छात्र सद्भाव सम्मेलन का आयोजन किया या एक अन्य कार्यक्रम के माध्यम से संपूर्ण भारतीय संस्कृति के दर्शन द्वारा दिखाया गया।फ्रांस को पहनावे के मामले में दुनिया में अग्रणी बनाया।

ऐसे ही एक देश के 22 छात्र मझगांव स्थित सेंट मैरी स्कूल के छात्रों के साथ रहे और अपने परिवारों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बृहन्मुंबई नगर पालिका के उद्यान अधीक्षक जितेंद्र परदेशी, फ्रांस की राजदूत श्रीमती सूफी उद्यान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ज्ञानदेव मुंडे समेत सैंट मेरी स्कूल का शिक्षण मंडल मौजूद रहा। उद्यान अधिक्षक जितेन्द्र परदेसी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का होना बहुत जरूरी है अलग अलग देशों की संस्कृति सभ्यता और शिक्षण विकास उच्चमानद़डों का आदान प्रदान बढ़ेगा। छात्रों को बेहतर तरीके से एक दूसरे को समझने जानने का अच्छा अवसर मिलेगा।

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